उत्तर प्रदेशबस्ती

बस्ती में 8.62 लाख के गांजे के साथ तीन गिरफ्तार, अंतर-प्रांतीय तस्करी गिरोह का पर्दाफाश

पकड़े गए आरोपियों में सनी और सौरभ वर्मा जैसे कम उम्र के चेहरे इस बात का दुखद प्रमाण हैं कि कैसे तस्कर गिरोह बेरोजगार और आसानी से बहकावे में आने वाले युवाओं को अपनी ढाल बना रहे हैं।

अजीत मिश्रा (खोजी)

छावनी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 8 किलो अवैध गांजा बरामद, ओडिशा कनेक्शन वाला सरगना रडार पर

  • ​अपराधियों के हौसले बुलंद: जेल से छूटकर फिर काले धंधे में जुटा शातिर तस्कर, पुलिस ने दबोचा
  • ​युवाओं को बना रहे थे मोहरा: छावनी थाने की मुस्तैदी से टला बड़ा खतरा, दो आरोपी अभी भी फरार

बस्ती की छावनी पुलिस ने अंतर-प्रांतीय गांजा तस्करों के खिलाफ जो शिकंजा कसा है, वह जितनी राहत की बात है, उतना ही गहरी चिंता का विषय भी है। हर्रैया क्षेत्र से परशुरामपुर की ओर 8 किलोग्राम गांजे के साथ तीन युवकों की गिरफ्तारी यह चीख-चीख कर कह रही है कि युवाओं को चंद रुपयों के लालच में अपराध की दलदल में धकेलने वाला यह सिंडिकेट ग्रामीण इलाकों में कितनी गहरी जड़ें जमा चुका है।

​सबसे हैरान करने वाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली बात यह है कि इस गिरोह का कथित सरगना सुरेश, जिसे ओडिशा पुलिस पहले भी गांजा तस्करी के मामले में जेल की हवा खिला चुकी है, कानून की नजरों से बचकर फिर से उसी काले धंधे में कैसे सक्रिय हो गया। यह उस लचर निगरानी तंत्र पर सीधा तमाचा है जहां शातिर अपराधी सलाखों के बाहर आकर और अधिक बेखौफ होकर अपने नेटवर्क का विस्तार करते हैं। क्या हमारे यहां सजा काट चुके या जमानत पर छूटे ऐसे पेशेवर अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखने का कोई प्रभावी सिस्टम नहीं बचा है?

​पकड़े गए आरोपियों में सनी और सौरभ वर्मा जैसे कम उम्र के चेहरे इस बात का दुखद प्रमाण हैं कि कैसे तस्कर गिरोह बेरोजगार और आसानी से बहकावे में आने वाले युवाओं को अपनी ढाल बना रहे हैं। 8 लाख 62 हजार रुपये के गांजे के साथ दो मोटरसाइकिल और तीन मोबाइल की बरामदगी इस बात का सबूत है कि यह कोई छुटभैयों का खेल नहीं, बल्कि एक सुनियोजित व्यापार है। पुलिस को देखते ही सुभाष और नीतेश साहू का मोटरसाइकिलें छोड़कर भाग जाना यह बताता है कि ये शातिर मौके की नजाकत भांपने में माहिर हैं, लेकिन उनकी यह चालाकी तब तक ही काम आएगी जब तक पुलिस उन तक पूरी तरह नहीं पहुंच जाती।

​छावनी थाने के प्रभारी निरीक्षक राणा देवेंद्र प्रताप सिंह और उनकी टीम की यह मुस्तैदी यकीनन तारीफ के काबिल है कि उन्होंने समय रहते इस खेप को बाजार में खपने से रोक लिया। लेकिन यह कार्रवाई सिर्फ एक बानगी होनी चाहिए। असली जीत तब मानी जाएगी जब फरार चल रहे सुभाष और नीतेश साहू समेत इस अंतर-प्रांतीय नेटवर्क के हर उस मास्टरमाइंड को सलाखों के पीछे धकेला जाएगा जो परदे के पीछे बैठकर युवाओं की जिंदगी से खेल रहा है। जब तक इस तस्करी के फन को पूरी तरह कुचला नहीं जाता, तब तक बस्तियों और कस्बों में यह जहर यूं ही बिकता रहेगा।

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